शीघ्र विवाह एवं विवाह में बाधा दूर करने के त्वरित उपाय
*विवाह योग्य लोगों को प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिये। केसर का भी उपयोग करना चाहिये।
*यदि ऐसे लोगों को गुरुवार के दिन गाय को दो आँटे के पेड़े पर थोड़ी हल्दी लगाकर, थोड़ा गुड़ तथा चने की गीली दाल का भोग खिलाना चाहिये।
*भूलकर भी वृद्धों का अपमान न करें। वृद्ध व्यक्तियों का यथा संभव सम्मान एवं मदद करें।
*यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से करना चाहिये। गुरुवार की शाम को पाँच प्रकार की मिठाई के साथ हरी इलायची का जोड़ा तथा शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिये। यह प्रयोग लगातार तीन गुरुवार करना चाहिये।
*गुरुवार को केले के वृक्ष के समक्ष अपने गुरु के 108 नामों के उच्चारण के साथ शुद्ध घी का दीपक जलाकर जल अर्पित करना चाहिये।
*मंगलवार को प्रातः सूर्योदय काल में एक सूखा नारियल लें। 300 ग्राम चूर्ण अर्थात पिसी शक्कर तथा 11 रुपये का पंचमेवा मिला लें। नारियल में एक इतना बड़ा छेद करें, जिसमें आपकी अंगुली जा सके। इसमें पिसी शक्कर व पंचमेवा मिलाकर भर दें और किसी पीपल के नीचे थोड़ा गड्डा कर दबा दें। जो शक्कर बचे उसे गड़े के ऊपर ही डालकर एक पत्थर रख दें जिससे कोई जानवर उसे न निकाल पाये। ऐसा आप लगातार 7 मंगलवार को करें। किसी भी कन्या के लिये लगातार सात मंगलवार नहीं हो सकते परंतु इस प्रयोग में (एम.सी.) दिनों की समस्या है। इसलिये जब यह समस्या आये तो उपाय रोक दें और शुद्ध होने पर पुनः आरम्भ कर दें। इस प्रयोग में यह सावधानी रखनी है कि सोमवार की रात्रि से मंगलवार, प्रयोग होने तक जल नहीं पीना है और किसी से भी बात नहीं करनी है। सात मंगल होने के बाद आप चमत्कार स्वयं देखेंगे।
*यदि किसी कन्या की पत्रिका में मंगल योग होने के कारण विवाह में बाधा आ रही हो तो वह कन्या मंगल चण्डिका स्तोत्र का मंगलवार तथा शनिवार को सुन्दर काण्ड का पाठ करें। इससे भी विवाह बाधा दूर होती है।
*यह प्रयोग स्त्री वर्ग के लिये ही है, विशेषकर आयु होने के बाद, भी विवाह होने में बाधा आने से मुक्ति के लिये है। शुक्रवार की रात्रि में आठ सूखे छुआरे जल में उबालेकर जल के साथ ही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रख कर सोयें तथा शनिवार को प्रातः स्नान करने के बाद किसी भी बहते जल में प्रवाहित कर दें। यह प्रयोग भी चमत्कारी है।
*यह प्रयोग भी सिर्फ कन्या वर्ग के लिये है। इस प्रयोग के लिये किसी भी शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि को प्रातः काल में स्नान से निवृत होकर के बाद श्रीराम व सीता के संयुक्त चित्र का पूजन के पश्चात चित्र के सामने बैठ जायें। फिर निम्न चौपाई का 108 बार पाठ करें। यह उपाय लगातार 40 दिन तक करना है। कन्या वर्ग को उनके अस्वस्थ दिनों की छूट होती है, इसलिये जब तक पुनः शुद्ध न हो जाये तब तक इस प्रयोग को रोक देना चाहिये। शुद्ध होने पर पुनः आरम्भ करें। अशुद्ध होने से पहले तथा शुद्ध होने के दिनों की मिलकर ही दिनों की गिनती होगी। प्रभु की कृपा से 40 दिनों में ही रिश्ता हो जाता है।
चौपाई-सुख सिय सत्य असीस हमारी । पुजहिं मनकामना तुम्हारी ॥
*जिस कन्या की शादी सम्बन्ध होने के बाद टूट जाती हो अथवा किसी कन्या को नापसंद किया जाता हो, उनके लिये यह प्रयोग बहुत ही प्रभावशली है। यह प्रयोग मुसलमानी है। इस उपाय में कोई नियम नहीं है। जिस कन्या का विवाह होना है, उसी को यह प्रयोग व मंत्र जाप करना है। इस मंत्र का जाप रूद्राक्ष की माला के अतिरिक्त, किसी से भी किया जा सकता है। इस प्रयोग को आरम्भ करने के लिए आप किसी भी दिन का चयन करें। उस दिन किसी भी सूती कृपालु आसन पर पश्चिम दिशा की ओर मुख बैठ जायें। गुलाब की 11 अगरबत्ती तथा कण्ठे अर्थात उपले पर अग्नि प्रज्वलित कर उस पर थोड़ा लोबान डालकर मंत्र जाप आरम्भ करें। एक ही बैठक में इस मंत्र का 1000 बार जाप करना है। यह प्रयोग लगातार 13 दिन तक करना है। दिनों का चयन आप इस प्रकार से कर सकते हैं कि आपको कोई भी समस्या न आये। यह प्रयोग बहुत ही प्रभावशली है।
मंत्र है-
मखनो हाजी जर्द अम्बारी ।
उस पर बैठी कमाल खा की सवारी ।
बैठे चबुतरे पड़े कुरान ।
हजार काम दुनियां करे । एक काम मेरा कर ।
ना करे तो तीन लाख तंतीस हजार पैगम्बरों की दुहाई ।
*शीघ्र विवाह के लिये सोमवार को 1200 ग्राम चने की दाल व सवा लीटर कच्चा दूध दान करें। जब तक विवाह न हो, तब तक यह प्रयोग करते रहना है। इस प्रयोग को करने से देखे की आपका विवाह योग चल रहा है या नहीं।
*किसी भी पूर्णिमा को रात्रि में एक कलश में जल भरकर उसमें एक कमल का पुष्प व एक कमलगट्टा डाल दें। फिर पाँच सुहागिनों से उस कलश को एक चौकी पर लाल वस्त्र के ऊपर रखवायें। उस कलश को किसी भी विद्वान व कर्मकाण्डी ब्राह्मण से श्रीसूक्त से अभिमंत्रीत करवाकर सुहागिन स्त्रियों से ही अभिषेक करवा कर
ॐ गं गणपत्ये नमः
मंत्र की बीस माला का जाप इसी ब्राह्मण से करवायें। अगले दिन किसी मन्दिर में उस कलश को रखवा दें। इस प्रयोग से कुछ ही समय में उस कन्या का विवाह अवश्य हो जायेगा।
*यह उपाय भी कन्या को करना है। इस उपाय में किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम सोमवार से भगवान शिव के नाम से सात व्रत का संकल्प लेकर व्रत आरम्भ करें। कन्या श्वेतार्क (फूँड़हर) के वृक्ष के पास जाकर धूप-दीप अर्पित कर जल आचमन कर आठ पते तोड़कर लाये। सात पत्तों की तो पतल बनाये तथा आठवें पते पर कन्या अपना नाम लिख कर भगवान शिव को अर्पित करे। व्रत का भोजन सात पत्तों की पतल पर ही करें तथा व्रत पूर्ण होने के बाद श्वेतार्क के पुष्प भगवान शिव को अर्पित करें।
*विवाह के बाद कन्या अपने पति के साथ जाकर 108 श्वेतांक के पुष्प की माला बनाकर भगवान शिव को अवश्य अर्पित करे।
*कन्या जब किसी दूसरी कन्या के विवाह में जाये यदि वहां पर कन्या को मेहन्दी लग रही हो तो अविविहित कन्या कुछ मेहन्दी उस कन्या के हाथ से लेकर लगवा ले तो विवाह का मार्ग प्रशस्त होता है।
*कन्या सफेद खरगोश को पाले तथा अपने हाथ से ही उसे भोजन के रूप में कुछ दे। यदि विवाह में बुध रुकावट रहा हो तो कन्या खरगोश को हरी घास खिलाये।
*कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके पिता या अन्य जभ भी किसी के यहां जाये तो कन्या खुले बालों से, लाल वस्त्र धारण कर हंसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला कर विदा करे। विवाह की चर्चा सफल होगी।
*यदि कन्या के मंगली होने के कारण विवाह में बाधा आती है तो कन्या को प्रत्येक मंगलवार श्री मंगल चण्डिका स्तोत्र का पाठ करना चाहिये तथा लाल मूँग की माला से निम्न मंत्र का जाप करना चाहिये-
ॐ ह्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवि मंगल चण्डिके हूं फट् स्वाहा।
इसके साथ सुन्दर काण्ड का भी पाठ करना चाहिये। जिस कन्या का विवाह आयु होने के बाद भी नहीं हो रहा हो तो उसे पाँच रत्ती का पुखराज अथवा 9 रत्ती का सुनहला उपरत्न त्रिधातु (62 प्रतिशत चांदी, 26 प्रतिशत तांबा व 12 प्रतिशत सोना) में जड़वा कर गुरुवार को आयें हाथ की तर्जनी अंगुली में प्रातःकाल सूर्योदय से प्रथम घण्टे में ईशान कोण अर्थात् पूर्व व उत्तर दिशा को ओर मुख करवाकर धारण करना चाहिये। धारण करने से पहले दूध, शहद व गंगाजल में अंगूठी को शुद्ध अवश्य करना चाहिये। धारण करते समय कन्या को मानसिक रूप से ॐ बृ बृहस्पत्यै नमः का जाप करना चाहिये। धारण करने के बाद गाय को भोग अवश्य देना चाहिये। उपाय को और अधिक प्रभावी बनाने के लिये 7 रत्ती का फिरोजा नाम का रत्न चांदी में जड़वा कर शुक्रवार को कनिष्ठिका में दक्षिण की ओर मुख करवा कर धारण करवा दें।



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